बदरीनाथ–केदारनाथ मंदिर समिति ने ज्योतिर्मठ स्थित मुख्यालय में आजादी से पहले जन्मे उन बुजुर्गों के सम्मान में, जिन्होंने देश की गुलामी और आजादी दोनों को अपनी आँखों से देखा है, विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में 80 वर्ष से अधिक आयु के 96 बुजुर्गों को सम्मानित किया गया। इन बुजुर्गों ने न केवल गुलामी का कठिन समय देखा, बल्कि देश के स्वतंत्र होने की खुशी को भी जिया है।
इस खास मौके पर बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने ज्योतिर्मठ के पवित्र नरसिंह मंदिर में इन बुजुर्गों को आमंत्रित किया। यहाँ एक भव्य समारोह का आयोजन हुआ, जिसमें झंडारोहण के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की गई। इसके बाद मिष्ठान वितरण का आयोजन हुआ, जिसमें सभी ने उत्साह के साथ भाग लिया। समिति ने इन बुजुर्गों के प्रति अपनी श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करने के लिए उनके पैर धोए, उनकी पूजा-अर्चना की और उन्हें शॉल, मिठाई और पुरस्कार देकर सम्मानित किया।
ये बुजुर्ग, जिन्होंने देश के स्वतंत्रता संग्राम के कठिन दिनों को देखा और फिर आजाद भारत के 78 वर्षों की यात्रा को भी अनुभव किया। उनके लिए यह सम्मान न केवल उनके योगदान का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि हमारी नई पीढ़ी अपने इतिहास और उन लोगों के प्रति कितनी कृतज्ञ है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए बलिदान देखे।
बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के इस प्रयास की सभी ने प्रशंसा की। यह कार्यक्रम न केवल बुजुर्गों के लिए सम्मान का क्षण था, बल्कि यह भी एक संदेश था कि हम अपने अतीत को कभी नहीं भूलेंगे और अपने बुजुर्गों का हमेशा आदर करेंगे।
बदरीनाथ–केदारनाथ मंदिर समिति के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती ने कहा कि स्वतंत्रता से पूर्व जन्में बुजुर्ग हमारे लिए पूजनीय है, कहा कि इन बुजुर्गों के चरण धुलवाए और चरण पखारे। कहा कि इन बुजुर्गों के आशीर्वाद और मार्गदर्शन में ही बदरीनाथ–केदारनाथ की सफल यात्रा संचालित होती है।
बदरीनाथ–केदारनाथ मंदिर समिति द्वारा जिन बुजुर्ग महिलाओं का सम्मान किया गया उनमें बसंती देवी सती, शांति देवी नंबूरी, सुरमा देवी पंवार, सुंदरी देवी नेगी, रमा देवी नेगी, ज्ञानेश्वरी देवी, सत्येश्वरी देवी डिमरी, रूकमणी देवी, रामेश्वरी देवी सकलानी, जानकी देवी सती, नारायणी देवी शाह, शिवि देवी, जानकी देवी खंडूरी, सत्येश्वरी देवी सकलानी, गीता देवी भट्ट शामिल थी।