भू–बैकुंठ धाम भगवान बदरी विशाल के कपाट 23 अप्रैल 2026 बृहस्पतिवार को प्रातः 6 बजकर 15 मिनट पर मेष लग्न में ब्रह्म मुहूर्त पर सभी सनातनियो के लिए खुल जायेंगे। आज बसंत पंचमी के पावन पर्व पर टिहरी राजदरवार में टिहरी के राजा, पंडित, पुरोहितों और बदरीनाथ–केदारनाथ मंदिर समिति धर्माधिकारी, वेदपाठी की उपस्थिति में पंचाग गणना के बाद कपाट खुलने की घोषणा की गई। भगवान के महाअभिषेक के उपरांत 6 महीने भगवान के विग्रह पर लगने वाला तिलो का तेल राजदरबार नरेन्द्र नगर टिहरी में महारानी व अन्य सुहागिन महिलाओं के द्वारा कपाट खुलने से पूर्व 7 अप्रैल 2026 को टिहरी राज दरबार में गाड़ू घड़े में प्रयुक्त होने वाला तेल पिरोया जाएगा।
देशभर की चारधाम यात्राओं में विशेष भगवान बदरी विशाल जी की यात्रा 6 माह बाद सनातन धर्म के अनुयायियों और भक्तों के दर्शन हेतु खोले जाएंगे। हिन्दू धर्म में चारधाम यात्रा को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। प्रत्येक वर्ष एक निश्चित अवधि के लिए चार धाम यात्रा का शुभारंभ होता है। जिनमें से बदरीनाथ धाम यात्रा को विशेष माना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि बदरीनाथ धाम को भगवान विष्णु का प्रमुख निवास स्थल माना जाता है। बदरीनाथ धाम अलकनंदा नदी के तट पर दो पर्वतों के बीच स्थित है, जिनके नाम नर और नारायण हैं। इस धाम में भगवान विष्णु के 24 स्वरूपों में से एक नर-नारायण भगवान की पूजा की जाती है। कपाट खुलने के सन्दर्भ में बात करें तो इस धाम के कपाट तीन चाबियों से खोले जाते हैं और तीनों चाबियां अलग-अलग लोगों के पास सुरक्षित रखी जाती है।