एनटीपीसी परियोजना का कार्य तीसरे दिन भी ठप, प्रत्येक दिन करोड़ों का हो रहा नुकसान, आंदोलनकारी 15 सूत्रीय मांगों को लेकर है अनिश्चितकालीन धरने पर

तपोवन विष्णुगाढ जल विद्युत परियोजना का कार्य कर रही एनटीपीसी कंपनी का कार्य आज तीसरे दिन भी ठप रहा। प्रभावित गांवों के ग्रामीण अपनी 15 सूत्रीय मांगों को लेकर 1 अप्रैल से धरने पर बैठे है। प्रभावित ग्रामीणों की 15 सूत्रीय मांगों में सबसे अहम टीएचडीसी की तर्ज पर एनटीपीसी प्रभावित गांवों के काश्तकारों को चारापत्ती मुआवजे का वार्षिक भुगतान, स्थानीय बेरोजगारों को कंपनी में रोजगार, श्मशान घाटों का विकास, फरवरी 2021 की आपदा में मारे गए मृतकों के आश्रितों को रोजगार देने, प्राकृतिक जल स्त्रोतों का विकास मुख्य है। पिछले 3 दिनों से प्रभावित ग्रामीण बैराज साईट तपोवन, टीवीएम साईट सेलंग, अनिमठ साईट पर पूर्ण रूप से निर्माण कार्य ठप है। ग्रामीण इन साइटों पर सुबह 7 बजे से क्रमिक अनशन पर डट जा रहे है। धरने पर बैठे प्रभावित ग्रामीणों का आरोप है कि एनटीपीसी ग्रामीणों के साथ छलावा कर रही है और रोजगार समेत अन्य योजनाओं में वादा खिलाफी कर रही है। उनका ये भी कहना है कि एक ही विकासखंड में में दो परियोजनाएं टीएचडीसी और एनटीपीसी कार्यरत है। जबकि टीएचडीसी परियोजना प्रभावितों को वार्षिक 30 हजार रुपए चारापत्ती मुआवजे का भुगतान करती है जबकि एनटीपीसी परियोजना प्रभावितों को चारापत्ती मुआवजे का कुछ भी भुगतान नहीं करती है। ऐसे में कंपनी से प्रभावितों का सवाल है कि एक ही विकासखंड में दो तरह के कानून क्यों है। इसके अलावा ग्रामीणों का कंपनी यह भी आरोप है कि वो बाहरी लोगों को कंपनियों में रोजगार दे रही है जबकि स्थानीय ग्रामीण प्रभावित होने के साथ ही बेरोजगार है उनको रोजगार नहीं दिया जा रहा है। ज्योतिर्मठ विकासखंड के प्रधान संघ अध्यक्ष मोहन बैंजवाल जो कि प्रभावित गांवों के एनटीपीसी के खिलाफ चल रहे आंदोलन का नेतृत्व कर रहे है। उनका कहना है कि कई बार ग्रामीणों द्वारा उनकी मांगों के संदर्भ में एनटीपीसी, तहसील प्रशासन और जिला प्रशासन से मांग की गई लेकिन कहीं से भी ग्रामीणों की मांगों का समाधान नहीं हुआ जिस कारण प्रभावित ग्रामीण कंपनी के खिलाफ आंदोलन करने के लिए बाध्य है। उन्होंने कहा कि यदि कंपनी उनकी मांगों को नहीं  मानती है तो वो आंदोलन को और व्यापक करने के लिए बाध्य होंगे।
वहीं कंपनी प्रशासन का कहना है कि उन्होंने प्रभावित ग्रामीणों की जमीन, जल, जंगल, गोचर, पनघट का वन टाइम सेटलमेंट किया है जिस कारण कंपनी का प्रभावित ग्रामीणों को चारापत्ती मुआवजा भुगतान किया जाना संभव नहीं है।
ग्राम प्रधान सेलंग रोशना बिष्ट और क्षेत्र पंचायत सदस्य वर्षा बिष्ट का कहना है कि ग्रामीणों की लंबित मांगों के संदर्भ में कई बार पत्राचार और मुलाकात की गई लेकिन कंपनी प्रशासन ग्रामीणों की मांगों को अनदेखा कर रही है। कहा कि ग्रामीणों की जब तक मागों को नहीं माना जाता तब तक आंदोलन जारी रहेगा और जरूरत पड़ी आंदोलन को और उग्र एवं व्यापक किया जायेगा।
सेलंग टीवीएम साईट पर धरने पर बैठने वालों में वन पंचायत सरपंच शिशुपाल भंडारी, महिला मंगलदल अध्यक्षा सरिता देवी, पंकज बिष्ट,लक्ष्मण सिंह पंवार, गोबिंद सिंह फरस्वांण, राजे सिंह बिष्ट, प्रदीप पंवार, मनीष नेगी, आशा देवी, रेखा देवी, भवानी देवी, धनेश्वरी देवी, गौरी देवी सहित अन्य ग्रामीण धरने पर डटे रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share

You cannot copy content of this page