भगवान बदरी विशाल की कपाट खुलने की प्रक्रिया के तहत आज बदरीनाथ धाम की शीतकालीन पूजा स्थली नृसिंह मंदिर में बदरीनाथ धाम के रावल, धर्माधिकारी और समस्त पंडितों ने भगवान नृसिंह, गरुड़ जी लक्ष्मी जी, गणेश जी, शंकराचार्य जी की प्राचीन और पवित्र गद्दी की पूजा संपन्न की।
उसके बाद मंदिर प्रांगण में विधिवत पंच पूजा के पश्चात भगवान शंकराचार्य की प्राचीन गद्दी और विष्णु वाहन भगवान गरुड़ जी की डोली, पवित्र गाडू घड़ा ने आज भू–वैकुंठ धाम को लिए प्रस्थान किया।
सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु इस विशेष आयोजन के साक्षी बने। आज भगवान शंकराचार्य की पवित्र गद्दी, गरुड़ जी की डोली और पवित्र गाडू घड़ा का भगवान कुबेर और उद्धव जी की शीतकालीन पूजा स्थली पांडुकेश्वर में मिलन होगा और रात्रि प्रवास पांडुकेश्वर में ही होगा।
कल पांडुकेश्वर में बदरीनाथ धाम के मुख्य पुजारी रावल विधिवत पूजा अर्चना के बाद भगवान शंकराचार्य जी की गद्दी, भगवान गरुड़, कुबेर जी, उद्धव जी की देव डोलियां पांडुकेश्वर से बदरीनाथ धाम के लिए प्रस्थान करेंगी जिसमें कुबेर जी बामणी गांव में प्रवास करेंगे और अन्य सभी देव डोलियां धाम में प्रवास करेंगी और 23 अप्रैल को प्रातः 6 बजकर 15 मिनट पर भगवान बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने से पूर्व सभी देवता धाम में भगवान बदरीनाथ जी के साथ प्रतिष्ठित हो जाएंगे।
भगवान नृसिंह मंदिर आज प्रातःकाल से ही भगवान बदरी विशाल जी के जयकारों के साथ गुंजायमान रहा। आर्मी बैंडों की धुन, ज्योति विद्यालय के बैंडों की धुनों और महिला मंगलदलों के भजनों और भारी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी में देव डोलियों ने प्रस्थान किया।
बदरीनाथ धाम के धर्माधिकारी स्वयंवर सेमवाल का कहना है कि, ज्योतिर्मठ के नृसिंह मंदिर में आज वेद मंत्रों के द्वारा भगवान बदरीनाथ जी का पूजन किया गया, गणेश जी की पूजा संपन्न की गई और परम्पराओं के अनुसार डोली आज पांडुकेश्वर के लिए प्रस्थान करेंगी, कहा कि देव डोलियों के धाम पहुंचने के पश्चात 23 अप्रैल को मेष लग्न में प्रातःकाल 6 बजकर 15 मिनट पर भगवान बदरीनाथ जी के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनों के लिए खोल दिए जायेंगें।
इस अवसर पर बदरीनाथ धाम के मुख्य पुजारी रावल अमरनाथ नंबूदरी, नायब रावल सूर्यराग पी., रविन्द्र भट्ट, बदरीनाथ–केदारनाथ मंदिर समिति के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती, पूर्व धर्माधिकारी भुवनचंद्र उनियाल, देव पूजाई समिति के अध्यक्ष अनिल नंबूरी, प्रकाश भंडारी समीर डिमरी समेत धाम के हक–हकूकधारी, पंडा–पुरोहित, मंदिर समिति के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।