उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध लोकप्रिय लोकगायक किशन महिपाल ने पैनखंडा महोत्सव में दर्शकों को देर रात तक थिरकने और झूमने के लिए किया मजबूर, अंतिम संस्कृतिक रात्रि कार्यक्रम में बांधा समा।
महोत्सव की अंतिम सांस्कृतिक संध्या में महिपाल ने एक से बढ़कर एक अपने गानों को गया जिसमें दर्शकों ने खूब ठुमके लगाए। दूर–से लोग किशन महिपाल के गानों को सुनने के लिए रविग्राम खेल मैदान में पहुंचे थे। किशन महिपाल भगवान बदरी विशाल के जागर से सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत की।
इसी क्रम में हे रूडी, घुघुति, स्याली बम्पाली, ओ भाना रंगीला भिना और अंत में हाल ही में रिलीज हुए उनके गीत “यु मन त्वे बिना नि रौंदू, जिया कोरी कोरी खांदो” लोगों को खूब पसंद आया और पूरे दर्शक इस गाने पर झूमने लगे। माणा घाटी के किशन महिपाल अपनी लोक संस्कृति से जुड़े गीतों को गाने के साथ ही गढ़वाली गजल गीत गाने के लिए मशहूर है।
देश और विदेश तक उनके गाए हुए गीतों की धूम है। पैनखंडा महोत्सव की अंतिम सांस्कृतिक संध्या में बदरीनाथ विधायक लखपत बुटोला, श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. यू. एस. रावत, पूर्व ब्लॉक प्रमुख एक पूर्व राज्यमंत्री ठाकुर सिंह राणा, नगर पालिका अध्यक्षा देवेश्वरी शाह, ब्लॉक प्रमुख अनूप नेगी, मेला उपाध्यक्ष किशोर पंवार, नैन सिंह भंडारी, दीपक शाह समेत बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे।