सीमांत विकासखंड ज्योतिर्मठ की बीडीसी बैठक पिछले 7 माह से आयोजित नहीं हुई है जिससे ग्रामीण विकास की योजनाएं धरातल पर नहीं उतर पा रही है। आज प्रधान संगठन ज्योतिर्मठ के द्वारा उपजिलाधिकारी ज्योतिर्मठ के माध्यम से पंचायत राज मंत्री को ज्ञापन दिया गया है। जिसमें कहा गया है कि पिछले कई महीनों से ज्योतिर्मठ विकासखंड की बीडीसी बैठक आयोजित नहीं हुई है। किसी भी विकासखंड का बीडीसी एक सदन होता है जिसमें क्षेत्रपंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान, जिला पंचायत सदस्य अपने–अपने पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों, जिला पंचायत क्षेत्रों की विकास योजनाओं को रखते है और बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारी भी मौजूद होते है। हालांकि 12 जून को ज्योतिर्मठ विकासखंड की बीडीसी बैठक बुलाई गई थी लेकिन उस बैठक में विभागीय अधिकारी न पहुंचने के कारण सदस्यों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया था। तब से लेकर आज तक बीडीसी बैठक आयोजित नहीं हो पाई है। प्रधान संगठन ने सरकार पर पंचायतों को कमजोर करने और ग्रामीण विकास की अवधारणा के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है। प्रधान संगठन ज्योतिर्मठ के अध्यक्ष मोहन बैंजवाल ने कहा कि पंचायतों के गठन का 1 वर्ष पूर्ण हो चुका है लेकिन तब से लेकर अभी तक मात्र एक बैठक ही बीडीसी की आयोजित हो पायी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जनवरी माह में जो बीडीसी आयोजित हुई थी उस बैठक में जनप्रतिनिधियों ने ग्राम विकास से संबंधित जो भी प्रस्ताव रखे थे आज तक उन प्रस्तावों पर विभागीय स्तर से कोई कार्यवाही नहीं हुई है। प्रधान संगठन ने ज्ञापन के माध्यम से अविलंब ज्योतिर्मठ विकासखंड की बीडीसी बैठक आयोजित करने की मांग की है। ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि पिछली बैठक को प्रगति आख्या आने वाली बीडीसी बैठक में संबंधित अधिकारी ले कर आए नहीं तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ शख्त कार्यवाही की जाय। ज्ञापन देने वालों में ग्राम प्रधान ढाक, ग्राम पंचायत गणाई, ग्राम प्रधान मेरग, ग्राम प्रधान लामबगड़, ग्राम प्रधान डुंग्रा, ग्राम प्रधान बड़गांव, ग्राम प्रधान रैणी, ग्राम प्रधान लंगसी, ग्राम प्रधान भलागांव, ग्राम प्रधान गुलाबकोटी समेत कई गांवों के प्रधान सम्मिलित थे।